भारत करेगा ‘वर्ल्ड रोबोट ओलंपियाड’ 2016 की मेजबानी


NEW DELHI, India – November 27, 2015 – वर्ल्ड रोबोट ओलंपियाड (डब्ल्यूआरओ) के 13वें संस्करण का आयोजन नवंबर 2016 में नई दिल्ली में किया जाएगा और भारत इसकी मेजबानी करेगा। यह पहली बार है जब भारत को इस कार्यक्रम के आयोजन हेतु चुना गया है। भारत सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय के अंतर्गत संचालित होने वाले नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजिम्स (एनसीएसएम) द्वारा इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की मेजबानी, इंडिया स्टेम फाउंडेशन (आईएसएफ) के साथ मिलकर की जाएगी। आईएसएफ एक गैर सरकारी संगठन है जो शिक्षा उपकरणों पर रोबोट्स एवं रिसर्च आधारित साधनों का नए तरीके से इस्तेमाल करता है, यह शिक्षा कंप्यूटर विज्ञान, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (सीएस स्टेम) से संबंधित है।

वर्ल्ड रोबोट ओलंपियाड एक वैश्विक रोबोटिक्स प्रतियोगिता है, जो दुनिया भर के युवाओं को एक मंच पर लाकर उन्हें चुनौतीपूर्ण एवं शिक्षाप्रद रोबोटिक्स प्रतिययोगिताओं के माध्यम से अपनी रचनात्मकता और समस्या समाधान कौशल के प्रदर्शन का अवसर प्रदान करता है।

वर्ष 2004 में 12 देशों की सदस्यता से शुरु होने वाले डब्ल्यूआरओ ने 2015 में शानदार बढ़त दर्ज की है और इसकी सदस्यता 55 से अधिक देशों तक पहुंच गई है। डब्ल्यूआरओ दुनिया भर से हजारों युवा प्रतियोगियों को नवीनता और तकनीक का उत्सव मनाने का मंच प्रदान करता है।

एनसीएसएम के महानिदेशक श्री जी. एस. रौतेला ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, रोबोटिक्स एक शानदार रचनात्मक मंच है जहां 21वीं सदी के कौशल सीखे जा सकते हैं। यह एक तकनीकि ज्ञान, उपकरण और एक प्रणाली है जिसमें सेंसर, नियंत्रण प्रणाली, मेनिप्युलेटर्स, ऊर्जा आपूर्ति और सॉफ्टवेयर सभी साथ मिलकर एक काम को करते हैं या फिर उत्पादन, शुद्धता और नियंत्रण से जुड़ी समस्याएं सुलझाते हैं। ऐसी समस्याओं के समाधान से छात्रों में नवीनता, रचनात्मकता एवं समस्या समाधान योग्यता का निर्माण होता है। आईआरओ एवं डब्ल्यूआरओ के संगठन छात्रों के बीच विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़ी चुनौतियां स्वीकार करने हेतु रुचि जगाने एवं प्रेरित करने में सहायता करेंगे।

आईएसएफ के संस्थापक निदेशक श्री सुधांशु शर्मा ने बताया कि, “भारत में डब्ल्यूआरओ 2016 का आयोजन निश्चित ही एक गौरवशाली पल है। हम सभी देशों का भारत में स्वागत करने को उत्सुक हैं। हम रोबोटिक्स के जरिये वैज्ञानिक, इंजीनियर, भविष्य के अविष्कारकों का निर्माण करने हेतु विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (स्टेम) के लिए समर्पित हैं।

डब्ल्यूआरओ का 13वां संस्करण नवंबर 2016 के दूसरे सप्ताह में आयोजित किया जाएगा जहां करीबन 55 देशों से आई 400 टीमों के हिस्सा लेने की उम्मीद है। एनसीएसएम और आईएसएफ ने इस प्रतियोगिता के आयोजक होने के नाते पूरे भारत के छात्रों को रोबोटिक्स क्षेत्र से परिचित कराने की योजना बनाई है, जो कि जमीनी एवं क्षेत्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के जरिये क्रियान्वित होंगी। इसका उद्देश्य देश के अधिकतम युवाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाते हुए उनमें प्रतिस्पर्धात्मक कौशल और मानक विकसित करने का उद्देश्य है। इससे पहले, एनसीएसएम पूरे भारत के 50 से अधिक विज्ञान केंद्रों के नेटवर्क के माध्यम से भारतीय रोबोट ओलंपियाड (आईआरओ 2016) का आयोजन भी करेगा।

डब्ल्यूआरओ में तीन छात्रों की एक टीम हिस्सा ले सकती है। प्रतियोगी टीम को ऐसे रोबोट मॉडल निर्माण एवं डिजाइन करने होंगे जो इंसान के तरह दिखें और व्यवहार करें और साथ ही एक समस्या का समाधान करें।

डब्ल्यूआरओ प्रतियोगिताएं चार अलग-अलग श्रेणियों में आयोजित की जाती हैं:

  • सामान्य श्रेणीः यह डब्ल्यूआरओ द्वारा शुरु की गई पहली प्रतियोगिता है। यह एक चुनौती आधारित प्रतियोगिता है जिसमें प्रतियोगी टीमों को एक चुनौती का हल करने हेतु रोबोट निर्माण करने होंगे, यह चुनौती एक टेबल पर स्थित होगी।
  • खुली श्रेणीः यह एक थीम आधारित प्रतियोगिता के रूप में शुरु की गई है, जिसमें टीमों को अपनी रचनात्मकता और समस्या सुलझाने के कौशल का उपयोग करते हुए स्मार्ट रोबोटिक समाधान तैयार करने होंगे जो प्रतियोगिता विषय के पूरक बनें।
  • डब्ल्यूआरओ जेन II फुटबॉलः यह नवीनतम श्रेणी 2010 में शुरु की गई है, जिसमें दो रोबोट्स 10 मिनट का एक फुटबॉल (सॉकर) गेम खेलते हैं। डब्ल्यूआरओ द्वाराडब्ल्यूआरओ जेन II फुटबॉल के नियम रोबोकप जूनियर ऑस्ट्रेलिया से साझा किये जाएंगे।
  • विश्वविद्यालय सामान्य श्रेणीः यह श्रेणी विशेष रूप से 17 से 25 वर्ष की आयु वाले छात्रों के लिए है जिसमें एक विकसित टास्क के साथ सेट किया गया रोबोट बनाना होता है।

हाल ही में कतर में आयोजित किये गये डब्ल्यूआरओ 2015 में भारतीय प्रतियोगियों ने पहली बार सामान्य (प्राथमिक श्रेणी) में गोल्ड मेडल और खुली श्रेणी (जूनियर हाई) में सिल्वर मेडल जीते थे।

श्री रौतेला ने आगे बताया कि, “ब्ल्यूआरओ 2015 में भारत का प्रतनिधित्व करने वाले सभी विजेताओं को मैं शुभकामनाएं देना चाहता हूं जिन्होंने दुनिया भर के प्रतियोगियों के साथ प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लिया। यह हम सभी के लिए गौरवशाली अवसर है। हमें गर्व है कि भारतीय बच्चे ना सिर्फ वैश्विक दौड़ में शामिल हैं बल्कि विश्व विजेता भी बन चुके हैं।

पूर्व में डब्ल्यूआरओ प्रतियोगिताएं – ताइपेई (2007), योकोहामा, जापान (2008), पोहांग, कोरिया (2009), मनीला, फिलिपींस (2010), अबु धाबी, यूएई (2011), कुआला लम्पुर, मलेशिया (2012), जकार्ता, इंडोनेशिया (2013), रूस (2014) और कतर (2015) में आयोजित की जा चुकी हैं।

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 NCSM के बारे में

एनसीएसएम, भारत सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संगठन है, और पूरे विश्व के विज्ञान केंद्रों/संग्रहालयों/प्लेनोटोरियम्स का सबसे बड़ा नेटवर्क है। इसका मुख्यालय कोलकाता में है, जहां से संगठन द्वारा 23 विज्ञान संग्रहालय/केंद्रों का संचालन किया जाता है और साथ ही 23 अन्य केंद्रों का निर्माण कर उन्हें देश भर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सौंपा जा चुका है। एनसीएसएम ने अन्य सरकारी संगठनों जैसे कि ओएनजीसी, बीईएल, आईसीएआर के लिए भी विभिन्न केंद्र और दीर्घाओं का निर्माण किया है और साथ ही संग्रहालय/विज्ञान केंद्रों या दीर्घाओं के विकास हेतु अंतरराष्ट्रीय गठबंधन किए हैं जैसे कि राजीव गांधी साइंस सेंटर, मॉरिशस,श्रीलंका स्थित इंटरनेशनल बुद्धिस्ट म्यूजियम मेंइंडिया गैलेरी ऑन बुद्धिज्म आदि। एनसीएसएम अपने मोबाइल विज्ञान प्रदर्शनियों, व्याख्यानों और प्रदर्शनों, प्रशिक्षण कार्यशालाओं, प्रकाशनों आदि के जरिये विज्ञान प्रसार और लोगों को सशक्त बनाने के लिए प्रयासरत है। एनसीएसएम ने त्रिनिदाद एंड टोबेगो, गुयाना, रूस, यूएसए, भूटान, चीन, बांग्लादेश, बुल्गारिया और फ्रांस में भी अपनी प्रदर्शनी भेजी हैं। संक्षेप में, एनसीएसएम विज्ञान की जानकारी और प्रौद्योगिकी कौशल और वैज्ञानिक मनोभाव/प्रकृति विकसित करने के साथ लोगों को सशक्त बनाने हेतु विज्ञान का प्रसार कर रहा है। एनसीएसएम द्वारा विकसित साइंस सिटी कोलकाता, भारत में देखने लायक श्रेष्ठ स्थानों में से एक है। अधिक जानकारी के लिए कृपया वेबसाइट www.ncsm.gov.in

ISF के बारे में

इंडियन स्टेम फाउंडेशन (ISF), एक गैर-लाभकारी संगठन है  जो रोबोटिक्स लर्निंग प्लेटफॉर्म और अन्य रिसर्च आधारित व्यावहारिक शिक्षा संसाधन का नए तरी के सेप्रयोग कर छात्रों में कंप्यूटर विज्ञान, विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित (CS-STEM) के प्रति रुचि बढ़ाने का काम करता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया वेबसाइट http://indiastemfoundation.org/  परजाएं।

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