अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ऑटिज़्म सलाहकार दिल्ली में दो दिवसीय सेमिनार करेंगे, परिवारों को फायदा मिलेगा


अमेरिका से डॉ. रैशेल शीली और डॉ. स्टीवन गटस्टाइनऔर भारत की श्रीमती कामिनी लखानी ऑटिस्टिक मरीज़ों के अभिभावकों और इसके लिए कार्यरत पेशेवरों को प्रशिक्षित करेंगे

दिल्ली, भारत दिसंबर 12, 2015 – मुंबई स्थित ऑटिज़्म ट्रीटमेंट सेंटर साई कनेक्शंस एक दो दिवसीय सेमिनार आयोजित करने जा रहा है जिसका उद्देश्य ऑटिज़्म के छिपे पहलूओं को उजागर करना है। इस दो दिवसीय सेमिनार की शुरुआत आज 12 दिसंबर 2015 से,  दिल्ली  के सीरी फोर्ट ऑडिटोरियम में हो चुकी है, एवं  यह सेमिनार कल 13 दिसंबर को सम्पन्न होगी।

आज, साई कनेक्शंस की संस्थापक और ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर ट्रेनर श्रीमती कामिनी लखानी ने दोनों दिनों की विस्तृत रूपरेखा की जानकारी दी, जिसमें ऑटिस्टिक बच्चों के अभिभावकों की सभी शंकाओं एवं चिंताओं का समाधान किया जाएगा। यह सेमिनार अभिभावकों को अपने बच्चे को बेहतर ढंग से समझने और उनके जीवन में एक विशेषज्ञ की भूमिका निभाने में मदद करेगा। पैरेंट्स और इस क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवरों को ऑटिज्म पर 20 वर्षों से अधिक वक्त तक अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों से चर्चा करने का मौका मिलेगा। यह दो दिवसीय सेमिनार , दिल्ली  के सीरी फोर्ट ऑडिटोरियम में 11 एवं 12 दिसंबर, 2015 को संचालित किया जाएगा।

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) एक मानसिक असंतुलन है जो एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति से बातचीत करने और उससे संपर्क करने की क्षमता को सीमित कर देती है। यह बाधाएं लोगों से बातचीत, मौखिक एवं अमौखिक संपर्क और अंदरूनी उत्साह में नजर आती है। ऑटिज्म स्पेक्ट्रम से ग्रसित व्यक्ति के व्यवहार में बाधित और बार-बार दोहराया जाने जैसी गतिविधियां शामिल होती हैं। पीडीडी-एनओएस (PDD-NOS) और आस्पेर्गर सिंड्रोम, ए.एस.डी. (ASD) के अंतर्गत वर्गीकृत हैं। इनमें जहां कुछ लक्षण सामान्य हो सकते हैं वहीं अन्य कुछ लक्षण गंभीर भी हो सकते हैं।

श्रीमती कामिनी लखानी ने कहा कि, ऑटिज़्म की पुष्टि होने वाले बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पिछले 15 सालों में पूरी दुनिया में इसमें लगभग 120 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। ऑटिस्टिक व्यक्तियों का प्रतिशत काफी कम है और इनमें कोई आर्थिक बाधाएं नहीं हैं। भारत में ऑटिज़्म के प्रति जागरूकता बढ़ रही है लेकिन तब भी यह काफी कम है। ऑटिज़्म को एक जिम्मेदारी समझा जाता है, इसलिए यहां कई ऐसे पहलू हैं जिनपर थेरपिस्ट्स और अभिभावकों द्वारा ध्यान दिये जाने की जरूरत है।

डॉ. रैशेल शीली ने बताया कि, हम ना सिर्फ ऑटिस्टिक बच्चे के पैरेंट्स को आमंत्रित करते हैं बल्कि उनके शिक्षकों और प्रिंसिपल को भी बुलाते हैं। स्कूल शिक्षकों को यह समझना जरूरी है कि ऐसे बच्चों को अधिक ध्यान चाहिये होता है और उन्हें ऐसा प्रभावी तरीके से करना होगा। इस स्थिति के बारे में कई सारी गलत धारणाएं हैं जैसे कि बच्चे होशियार नहीं हैं, या फिर फुर्तीले नहीं है या रोजाना के काम नहीं कर पाते। ऑटिस्टिक बच्चों के लिए पैरेंट्स, शिक्षकों और इस क्षेत्र के ट्रेनर्स को सही प्रशिक्षण दिये जाने की जरूरत है

 डॉ. स्टीवन गटस्टाइन ने कहा कि, कुछ कम योग्यता वाले प्रैक्टिशनर अकसर यह भरोसा दिलाते हैं कि ऑटिज़्म को थेरेपी के जरिये ठीक किया जा सकता है। पैरेंस्ट्स इस स्थिति को ठीक करने के लिए ढेर सारा पैसा खर्च करते हैं लेकिन अकसर बच्चे की स्थिति को और बिगाड़ने का परिणाम पाते हैं। पैरेंट्स को ऑटिस्टिक बच्चों की जरूरतों के लिए संवेदनशील बनाना होगा। उन्हें अपनी बच्चे की स्थिति को समझने के लिए सही समय पर सही व्यक्ति से संपर्क करना होगा। उन्होंने आगे बताया कि, पैरेंट्स को बच्चे की क्षमता निर्माण के वर्षों में ही इस जरूरत को पूरा करना होगा। साथ ही, उन्हें अपने बच्चे के व्यवहार के कारणों को ढूंढना होगा ना कि इस महत्वपूर्ण पहलू को सिर्फ नजरअंदाज करते रहें। भारत में हमें अधिक थेरेपी और प्रशिक्षकों की जरूरत है जो बच्चे और परिवार केंद्रित हों

इन दो दिवसीय वर्कशॉप्स का लक्ष्य अभिभावकों की इन्हीं चिंताओं और समस्याओं को सुलझाने में मदद करना है। पैरेंट्स और इस क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवरों को ऑटिज्म पर 20 वर्षों से अधिक वक्त तक अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों से चर्चा करने का मौका मिलेगा। उन्हें ना सिर्फ वक्ताओं से बल्कि यहां मौजूद अन्य ऐसे अभिभावकों से अपनी निजी मुश्किलों से जुड़े गंभीर सवालों के जवाब मिल सकेंगे, जिनके खुद के ऑटिज्म पीड़ित छोटे और युवा बच्चे हैं। अभिभावकों और पेशेवरों को बच्चों में सुधार लाने के लिए सशक्त बनाया जाएगा। उन्हें दुनियाभर की ताजा एवं प्रमाणित प्रक्रियाओं से भी अवगत कराया जाएगा। यह वर्कशॉप ऑटिज्म एवं अन्य मानसिक अक्षमताओं के बारे में जागरूकता फैलाने के साथ अभिभावकों और इस क्षेत्र के पेशेवरों को ऑटिज्म जैसी गूढ़ पहेली के छिपे पहलूओं को तलाशने में भी मदद करेगा।

अधिक जानकारी के लिए कृपया विशाल कटारिया से 9819027660 पर संपर्क करें।

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साई कनेक्शंस के बारे में

साई कनेक्शंस मुंबई स्थित ऑटिज्म जागरूकता एवं प्रशिक्षण केंद्र है जो लगातार ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्तिओं को सशक्त बनाते हुए उन्हें अधिक उद्देश्यपूर्ण एवं पूरक जीवन व्यतीत करने में मदद करता आ रहा है। साई कनेक्शंस द्वारा अभिभावकों और प्रभावित व्यक्तियों के भाई-बहनों को भी सशक्त बनाते हुए संपूर्ण पारिवारिक जीवन का आनंद लेने में सहायता की जाती है। पिछले एक दशक से अधिक समय से साई कनेक्शंस ने अभिभावकों को यह समझने में मदद की है कि ऑटिज्म क्या है, और ऑटिज्म स्पेक्ट्रम से ग्रसित बच्चों एवं व्यक्तियों को उच्च गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय शिक्षा प्रदान की जा रही है। साई कनेक्शंस अभिभावकों और प्रभावित बच्चों के परिवारों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करता है जहां बच्चे को बेहतर ढंग से समझने और उसके व्यवहार में सुधार करने के लिए उपयुक्त जानकारी दी जाती है। साई कनेक्शंस में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (और एस्पेर्गर सिंड्रोम, पीडीडी-एनओएस एवं अन्य जैसे इसके रूप) का इलाज मूल कमियों और ऑटिज्म के साथ-साथ होने वाली अन्य स्थितियों के समाधान द्वारा किया जाता है।

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