6.47% की अनुमानित वित्तीय अक्षमता से प्रभावित होंगेभारतीय आईटी हार्डवेयर निर्माता और भौतिक बुनियादी ढांचे तथा कारोबारी माहौल की अक्षमता 9.40% रहने का अनुमान, एमएआईटी के अध्ययन के अनुसार कुल अक्षमता 15.87 % रहेगी


  • वित्तीय तथा बाजार से संबंधित विसंगतियों को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाने से अगले एक वर्ष में आईटी हार्डवेयर का उत्पादन दोगुना होकर 2.6 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे वर्ष 2020 तक आईसीटी और इलैक्ट्रोनिक हार्डवेयर उत्पादों के शून्य आयात के स्वप्न को पूरा करने में मदद मिलेगी और भारत पूरी दुनिया में ईएसडीएम आपूर्ति के केंद्र के तौर पर पहचान बना पाएगा।
  • अगर वर्ष 2020 तक 21 मिलियन पर्सनल कंप्यूटर की अनुमानित वार्षिक मांग को भारत पूरी तरह से अपने घरेलू उत्पादन के माध्यम से ही पूरा कर देता है और वैश्विक बाजार में 30% की हिस्सेदारी प्राप्त कर लेता है, तो  अनुकूल कर अंतर प्रणाली से देश में आईटी निर्माण और इससे संबंधित सेवाओं में करीब 10,56,000 रोजगार के अवसर सृजित हो सकते हैं।  

नई दिल्ली- मई 18, 2016 – देश के प्रमुख आईसीटी हार्डवेयर इंडस्ट्री संगठन,मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशनफॉर इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी  (MAIT) ने आईटी-इलैक्ट्रोनिक क्षेत्र में शून्य आयात का लक्ष्य प्राप्त करने में नीतिगत बाधाएंविषय पर आधारित अपनी रिपोर्ट जारी करने के लिए एक संवाददाता सम्मेलन सह इंडस्ट्री ब्रीफिंग का आयोजन किया।

इस रिपोर्ट को जारी करने के लिए आयोजित कार्यक्रम की शुरूआत स्मार्टलिंक के निदेशक तथा एमएआईटी के उपाध्यक्ष श्री नितिन  कुनकोलिएनकर के संबोधन से हुई।

इस अवसर पर बोलते हुएश्री नितिन कुनकोलिएनकर ने कहा, हमने भारत सरकार को कुछ विशेष नीतिगततथा बाजार से संबंधित हस्तक्षेप करने के सुझाव दिए हैं ताकि शून्य आयात के स्वप्न को साकार किया जा सके और देश में आईसीटी तथा इलैक्ट्रोनिक उत्पादों के घरेलू निर्माण की संस्कृति को बढ़ावा दिया जा सके। वर्ष 2020 तक भारत को पर्सनल कंप्यूटर के वैश्विक बाजार के तौर पर स्थापित करने में मदद करने और भारत सरकार द्वारा शुरू की गई मेक इन इंडिया औरडिजिटल इंडिया योजना के लक्ष्यों को प्राप्त करने में निर्माण क्षेत्र, खासकर आईटी-ईएसडीएम इंडस्ट्री के विकास की काफी अहमियत है

श्री कुनकोलिएनकर ने आगे कहा, “सही प्रयासों के जरिए आईटी हार्डवेयर के उत्पादन को एक वर्ष के भीतर बढ़ाकर 2.6 बिलियन डॉलर तक किया जा सकता है और भारत को ईएसडीएम आपूर्ति श्रृंखला का वैश्विक केंद्र बनने की राह पर मजबूती से खड़ा किया जा सकता है

यह अध्ययन इस तथ्य को रेखांकित करता है कि कम लागत वाले अन्य न्यायाधिकार क्षेत्रों की तुलना में भारत में आईटी-ईएसडीएम निर्माण के संबंध में कुछ अक्षमताएं मौजूद हैं। ऐसा अनुमान लगाया गया है कि दूसरे वैश्विक केंद्रों की तुलना में भारत में निर्माण की लागत अधिक है। यह अनुमान भौतिक कारकों, जैसे- तुलनात्मक रूप से महंगी ऊर्जा, रियल एस्टेट, रसद और माल ढुलाई के अतिरिक्त खर्च के साथ-साथ वित्तीय कारकों के आधार पर लगाया गया है। भारत में राज्य और केंद्र, दोनों सरकारों द्वारा कई प्रकार के कर और शुल्क लगाए जाते हैं। इनकी दोषपूर्ण संरचना की वजह से अक्सर घरेलू स्तर पर उत्पादों के निर्माण पर बुरा असर पड़ता है।

इसलिए, भारत में आईटी हार्डवेयर निर्माण क्षेत्र की स्थिति का गहराई से विश्लेषण करने के लिए इस मौजूदा अध्ययन की रूपरेखा तैयार की गई थी। इस अध्ययन में डेस्कटॉप पीसी, लैपटॉप पीसी और सर्वर के साथ-साथ चीन, ताईवान और अन्य पूर्व एशियाई देशों की तुलना में निहित खामियों को खोजने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके अलावा, इस अध्ययन के नतीजे कराधान की नीतियों में तत्काल तथा अल्पकालिक हस्तक्षेप को प्रस्तावित करते हैं, ताकि मौजूदा अक्षमता में कमी आ सके, इस क्षेत्र में विकास को नई ऊर्जा मिल सके और यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘शून्य आयात’ के स्वप्न को पूरा करने में अपना योगदान देकर मदद कर सके।

इस कार्यक्रम में इंडस्ट्री के दिग्गजों के एक संक्षिप्त सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें डेल इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट कंज्युमर एंड एसएमबी सह एमएआईटी के वाइस प्रेसिडेंट श्री कृष्णकुमार पी.; इंटेल इंडिया/दक्षिण एशिया के डायरेक्टर मार्केटिंग एंड मार्केट डेवलपमेंट श्री संदीप अरोड़ा; लेनेवो इंडिया के प्रबंध निदेशक श्री राहुल अग्रवाल और माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के कंट्री जेनरल मैनेजर-सीसीजी श्री प्रियदर्शी मोहपात्रा शामिल हुए।

घरेलू आईटी बाजार: अपने दोहन की प्रतीक्षा करता निवेश का एक अवसर

भारत आईटी उत्पादों और ईएसडीएम हार्डवेयर के लिए एक बड़ा और उभरता हुआ बाजार है। चूंकि घरेलू निर्माता कई प्रकार की अक्षमताओं से ग्रसित हैं, इसलिए इस बाजार के एक बड़े हिस्से की मांग को आयातित उत्पादों, खासकर चीन से आयात किए गए उत्पादों द्वारा पूरा किया जाता है। हमारा मानना है कि वर्ष 2015 में कुल 31.6 बिलियन डॉलर के ईएसडीएम बाजार में घरेलू निर्माताओं की हिस्सेदारी सिर्फ 45 प्रतिशत थी। वहीं आईटी उत्पादों के 5.8 बिलियन डॉलर वाले बाजार में घरेलू निर्माताओं की हिस्सेदारी महज 22 प्रतिशत के आसपास थी।

डेल के अधिकारी श्री कृष्णकुमार ने कहा, नियंत्रित किए जा सकने वाले कुछ कारकों, जैसे कर की दर पर ध्यान देकर भारत सरकार देश में निर्माण कार्य को अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकती है। इससे मौजूदा कंपनियों की क्षमता के इस्तेमाल में बढ़ोतरी होगी और ऐसी दूसरी कंपनियां भी निवेश करने के लिए आकर्षित होगीं, जो फिलहाल भारत में अपने उत्पादों का निर्माण करने के बजाए उनका आयात कर रही हैं। इस रणनीति की कामयाबी को स्मार्टफोन और टैबलेट वेंडर के मामले में पहले ही परखा जा चुका है। इसलिए, इस बात के पुख्ता संकेत हैं कि पीसी उद्योग भी इसी तर्ज पर कामयाबी हासिल कर सकता है

MAIT Delhi event pic

तकनीक प्राप्त करने की प्रक्रिया में सुधार

इंटेल के अधिकारी श्री संदीप अरोड़ा ने कहा, इंटेल भारत के नागरिकों तक नई तकनीकों को पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के एक हिस्से के तौर पर, जिसका लक्ष्य हमारे देश में डिजिटल विषमता को समाप्त करना है, भारत सरकार को निश्चित तौर पर उन तमाम अवसरों पर ध्यान देना चाहिए, जो तकनीक, खासकर पर्सनल कंप्यूटर को जनसाधारण  और अंतिम छोर पर खड़े उपभोक्ता के लिए सुलभ करा सकें। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रभावी नीति के निर्माण और उसे लागू करने की आवश्यकता पड़ेगी। साथ ही तकनीक के क्षेत्र की उन कंपनियों से भी गठजोड़ करना पड़ेगा, जो इस नीति के खांचे में समाहित होने लायक समाधान सृजित कर सकें और आखिरकार नागरिकों तक लाभ पहुंचाने में मदद कर सकें

सामग्री के सृजन तथा नवाचार के विकास को बढ़ावा

भारतीय युवक अभी भी सामग्री और ज्ञान के सृजन के लिए मूल रूप से नोटबुक पीसी और डेस्कटॉप पीसी का इस्तेमाल करते हैं। जब यही युवा नौकरी पाने के लिए तैयारी करते हैं, तब उनके लिए पीसी ही रोजगार के लिए जरूरी डिजिटल कौशल हासिल करने का प्राथमिक स्रोत बन जाता है। भारत में पीसी की पहुंच महज 9% है, जबकि श्रीलंका में इसकी पहुंच 12% और चीन में 50% है। भारत सरकार द्वारा डिजिटल इंडियाऔर स्किल इंडिया जैसी पहलों को प्राथमिकता दिए जाने से तकनीक का आसानी से सुलभ होना जरूरी हो गया है। यही एक तरीका है, जिससे हम भविष्य के लिए तैयार श्रमशक्ति का निर्माण कर सकते हैं। हमारा मानना है कि पीसी को प्रोत्साहन मिलने से भारत को एक डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था बनने में काफी मदद मिलेगी

पुर्जों के कई सप्लायरों के लिए भारत एक डिजाइन केंद्र के रूप में उभर रहा है। इन डिजाइन केंद्रों और नोटबुक पीसी तथा डेस्कटॉप पीसी की निर्माण इकाइयों को एक स्थान पर लाने से एक अद्भुत नवाचार चक्र को शुरू करने में मदद मिल सकती है, जिससे की भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास को स्थायित्व मिलेगा।

रोजगार सृजन की क्षमता

ऐसा अनुमान लगाया गया है कि प्रत्येक 10 लाख इकाइयों के उत्पादन से लगभग 660 लोगों को प्रत्यक्ष रूप से असेम्बली साइट पर रोजगार मिलता है और 2,640 अन्य लोगों को पुर्जों के निर्माण की वजह से अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है। इसके अलावा इस क्षेत्र से संबंधित सेवाओं के लिए रोजगार के तिगुने अवसरों के सृजन का सुरक्षित अनुमान भी लगाया जा सकता है। इसलिए, पीसी के घरेलू उत्पादन में वृद्धि होने से और घरेलू स्तर पर ही इसके पुर्जों का निर्माण होने से रोजगार के अवसरों पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा। अगर अभी सही नीतिगत कदम उठाए जाएं, तो वर्ष 2020 तक 21 मिलियन पर्सनल कंप्यूटर की अनुमानित वार्षिक मांग को भारत पूरी तरह से अपने घरेलू उत्पादन के माध्यम से ही पूरा करसकता है। इसके अलावा भारतीय कंपनियां अपने उत्पादन को बढ़ा कर 80 मिलियन पीसी इकाइयों तक ले जा सकेंगी और वैश्विक बाजार के 30 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर सकेंगी। इससे पीसी असेम्बली हेतु प्रत्यक्ष रोजगार के लगभग 53,000 अवसरों, पुर्जों के निर्माण हेतु 2,11,000 रोजगार के अवसरों और संबंधित सेवाओं हेतु लगभग  7,92,000 रोजगार के अवसरों सहित अगले पांच वर्षों में कुल 10,56,000 रोजगार अवसरों के सृजन में मदद मिल सकती है।

राजस्व पर प्रभाव बनाम लाभ

लिनेवो इंडिया के प्रबंध निदेशक श्री राहुल अग्रवाल ने संक्षेप में कहा, यह समय निर्माण की कमियों को दूर करने के लिए विशेष तौर पर नीतियां बनाने का है, ताकि मेक इन इंडियाऔर डिजिटल इंडिया के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके। पीसी निर्माण हेतु कर अंतर की नीति अब तक अप्रयुक्त रही क्षमता के उपयोग और आगे चल कर आईटी हार्डवेयर निर्माण के लिए स्थायी तंत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। स्मार्टफोन के निर्माण से जुड़ी सफलता की कहानी को ठीक इसी तरह से पीसी तथा सर्वर के लिए भी दोहराया जा सकता है

अंत में एमएआईटी के उपाध्यक्ष श्री नितिन  कुनकोलिएनकर ने कहा, इस बात को ध्यान में रखते हुए कि इस प्रस्ताव से होने वाले लाभ के जरिए राजस्व के नुकसान की धारणा को काफी हद तक तोड़ा जा सकता है, हमें उम्मीद है कि सरकार प्राथमिकता के आधार पर हमारे प्रस्तावों पर विचार करेगी

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