“बाढ़ और अन्य प्राकृतिक तथा मानव निर्मित आपदाओं का प्रभाव कम करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का बेहतर इस्तेमाल हो” – केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू


भविष्य में भारत आईओटी के जरिए आपदा प्रबंधन के लिए तैयार रहेगा: एमएआईटी डीआईएजी

सरकार तथा उद्योग जगत ने साथ मिलकर किया श्वेत पत्रों का अनावरण।आपदा प्रबंधन में आईओटी के लाभ तथा बेहतर नागरिक केंद्रित सेवाओं हेतु सरकार की सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं के आधार कार्ड सक्रियन से संबंधित हैं यह श्वेत पत्र।

नई दिल्ली, भारत – जुलाई 12, 2016 – डिजिटल इंडिया एक्शन ग्रुप (डीआईएजी)ने “प्रभावी आपदा प्रबंधन के लिए आईओटी” और “आधार सक्रियन: नागरिक केंद्रित सेवाओं के लिए ढांचा” नाम से दो सामयिक श्वेत पत्रों का अनावरण करने की घोषणा की है। डीआईएजी की स्थापना भारत सरकार के डिजिटल इंडिया मिशन में सहयोग के लिए नीतिगत पहलों पर विचार तथा उनकी निगरानी करने के लिए की गई थी। इस थिंक टैंक को मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (एमएआईटी)के द्वारा स्थापिक किया गया था। इन श्वेत पत्रों का अनावरण भारत सरकार के माननीय गृह राज्य मंत्री श्री किरण रिजिजू और एमएआईटी की अध्यक्षा सुश्री देबजानी घोष ने किया।

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इन श्वेत पत्रों को जारी करते हुए भारत सरकार के माननीय गृह राज्य मंत्री श्री किरण रिजिजू ने कहा, “सूचना तकनीक ने हमारे देश की सूरत बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डिजिटल इंडिया जैसी उल्लेखनीय पहल हमें नवाचार की सीमाओं का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। मुझे खुशी है कि सरकार द्वारा जोर-शोर से चलाई जा रही नीतियों तथा योजनाओं में मदद के लिए एमएआईटी जैसा औद्योगिक संगठन आगे आया है। इस संगठन ने सूचना तथा संचार तकनीकों के प्रभावी इस्तेमाल के कई बेहतर तरीके भी सुझाए हैं। इन तरीकों का इस्तेमाल आपदाओं के दुष्प्रभावों को कम करने और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के निष्पादन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया जा सकता है।”

पहले श्वेत पत्र का लक्ष्य आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं में आईओटी के संभावित इस्तेमाल तथा इसके अनुप्रयोगों के बारे में स्वीकार्यता तथा जागरूकता पैदा करना है। दूसरा श्वेत पत्र इस बात की रूपरेखा तैयार करता है कि आधार कार्ड प्रमाणीकरण के किसी ढांचे का इस्तेमाल सुधार के विभिन्न कार्यों के लिए कैसे किया जा सकता है। जैसे कि सरकार द्वारा ई-साइन जैसी सुविधा का इस्तेमाल प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चरणबद्ध सुधार हेतु, नागरिकों के लिए सार्वजनिक सेवाओं के बेहतर निष्पादन हेतु और मानव विकास के बड़े लक्ष्यों को हासिल करने हेतु कैसे किया जा सकता है।

एमएआईटी की अध्यक्षा सुश्री देबजानी घोष के अनुसार, “डिजिटल इंडिया के सपने को सफलतापूर्वक साकार करने के लिए नई उभरती हुई तकनीकों की पहचान करना तथा उनकी संभावित क्षमताओं का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है। जैसे कि आईओटी का इस्तेमाल आपदा प्रबंधन के लिए किया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से अप्रत्याशित घटनाओं की वजह से देश की अर्थव्यवस्था और नागरिकों के जीवन पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से बचा या उन्हें कम किया जा सकता है। इसी तरह सार्वजनिक परिवहन और सरकार के सप्लाई चेन मैनेजमेंट के लिए भी आईओटी बेहद प्रासंगिक है। इसके अलावा आधार कार्ड जैसे केंद्रीय रूप से प्रबंधित नागरिक सूचनाओं के भंडार का इस्तेमाल भी आईओटी के जरिए विभिन्न कार्यों के लिए किया जा सकता है। इस तरह के सूचना भंडार से जुड़े उपकरण सरकार द्वारा नागरिकों को प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य तथा शिक्षा से संबंधित सेवाओं के कुशल, लक्षित और सामयिक निष्पादन को संभव बना सकते हैं।”

सुश्री घोष ने यह भी कहा, “आधार के डेटाबेस के साथ आईओटी का इस्तेमाल करते हुए अगर इसमें क्लाउड, विश्लेषण की सूचनाओं और गतिशीलता के समाधान को भी आसानी से एकीकृत कर दिया जाए, तो आईसीटी उद्योग देश के विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सरकार का भरोसेमंद साथी बन सकता है।”

इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. साराश्वत और एनडीएमए के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एन.सी. मारवाह जैसे भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। इसके अलावा इस अनावरण कार्यक्रम में एमएआईटी, एक्सेंचर, एसएपी और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग की लीडरशिप टीमें भी उपस्थित थीं।

PDFसंपूर्ण आईओटी रिपोर्ट देखने के लिए कृपया पीडीएफ आइकन (दायीं तरफ मौजूद) पर क्लिक करें

 

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एमएआईटी आधार श्वेत पत्र देखने और डाउनलोड करने के लिए कृपया पीपीटी आइकन (दायीं तरफ मौजूद)पर क्लिक करें

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एमएआईटी का परिचय

एमएआईटी की स्थापना वर्ष 1982 में की गई थी। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक, शैक्षणिक तथा सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग को बढ़ावा देना, हार्डवेयर का प्रतिनिधित्व करना, प्रशिक्षण, शोध एवं विकास कार्य के साथ हार्डवेयर डिजाइन करना और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग से संबंधित अन्य सेवाएं प्रदान करना है। एमएआईटी के चार्टर में भारत के सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग को वैश्विक तौर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए विकसित करना, भारत में सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को बढ़ावा देना, देश के आर्थिक विकास में सूचना प्रौद्योगिकी की भूमिका को मजबूत बनाना, अंतर्राष्ट्रीय गठजोड़ के जरिए व्यापार को बढ़ावा देना, सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग में गुणवत्ता के प्रति चेतना बढ़ाना और भारत के सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग को वैश्विक स्तर के उद्योग में तब्दील करना शामिल है, जिससे कि इसका विश्व स्तरीय इस्तेमाल हो सके और एक बड़े वैश्विक बाजार का निर्माण हो सके। एमएआईटी को भारत में आईटी हार्डवेयर उद्योग की प्रगति और विकास में अहम भूमिका निभाने के लिए सरकार और उद्योग जगत, दोनों से मान्यता प्राप्त है। इसके अलावा यह सरकारी महकमों में आईटी उद्योग का एक मजबूत और असरदार प्रवक्ता बन कर भी उभरा है। अधिक जानकारी के लिए, कृपया वेबसाइट देखें: www.mait.com

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