बजट 2017-18 आईटी मैन्युफैक्चरिंग के लिए काफी महत्वपूर्ण रहेगा: एमएआईटी


बजट 2017-18 आईटी मैन्युफैक्चरिंग के लिए काफी महत्वपूर्ण रहेगा: एमएआईटी

  • रियायती शुल्क का लाभ पीसी और सर्वर सहित सभी आईटीए उत्पादों को दिया जाए
  • ड्यूटी डिफरेंशियल स्कीम के तहत शामिल किए जाने के लिए सीपीई उत्पादों की व्यापक सूची बने
  • केन्द्र और राज्य अप्रत्यक्ष कर के दायरे वाली आईटी उत्पाद सूची को एकीकृत किया जाए
  • आईसीटी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कन्वर्जेंस सेल की स्थापना

नई दिल्ली – दिसंबर 1, 2016 – भारत की आईटी इंडस्ट्री ने पिछले तीन दशकों के दौरान देश में आर्थिक विकास, विदेशी मुद्रा प्रवाह और रोजगार के मौके बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारतीय आईटी-इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री ने बाजार के आकार के मामले में लगातार वृद्धि देखी है, लेकिन अभी भी इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं में बिजली और वित्त की उच्च लागत, ट्रांजैक्शन का अधिक खर्च, मौजूदा कर ढांचे और स्वस्थ सप्लाई चेन के अभाव की वजह से भारत पीछे है। आईटीसी मैन्युफैक्चरर्स के शीर्ष संगठन मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (एमएआईटी) ने निवेश बढ़ाने और भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए कुछ सुझाव दिये हैं।

श्री नितिन कुनकोलियंकर, उपाध्यक्ष, एमएआईटी और निदेशक, कॉर्पोरेट अफेयर्स, स्मार्टलिंक नेटवर्क सिस्टम्स ने कहा, हम भारत में कम मैन्युफैक्चरिंग लागत और शुल्क लाभ का फायदा उठाते हुए स्थानीय बाजार की जरूरतों को पूरा करने के लिए सीपीई (कस्टमर प्रीमाइज इक्विपमेंट) उत्पादों के निर्माण और प्रोत्साहन पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं, जो अंततः सरकार की डिजिटल इंडिया पहल के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा। मेक इन इंडिया विजन स्थानीय मूल्य संवर्धन, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और लघु एवं मध्यम उद्यमों के सशक्तिकरण (एसएमई) पर जोर देता है ताकि घरेलू आईटीइलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की उत्पादकता बढ़े। यह भारतीय कंपनियों को उनके कामकाज को बढ़ाने और ग्लोबल सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाने में भी मदद करेगा

एमएआईटी की 2017-2018 के लिए बजट-पूर्व मांगों की खास बातें:

पीसी और सर्वर सहित सभी आईटीए उत्पादों के लिए रियायती शुल्क लाभ का विस्तार।

आईटी हार्डवेयर के लिए ‘मेक इन इंडिया’ विजन के साथ ही ‘डिजिटल इंडिया’ के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सभी आईटीए उत्पादों को रियायती उत्पाद और सीमा शुल्क का लाभ देना जरूरी है; मोबाइल फोन और टैबलेट्स जैसे कुछ उत्पादों को ही इस तरह का लाभ देने से सरकारी पहल का उद्देश्य पूरा नहीं होगा। स्थानीय स्तर पर बने आईटी-इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के लिए रियायती शुल्क का लाभ देने से निवेश को आकर्षित करने और रोजगार के मौके बढ़ाने के साथ स्थानीय जरूरत को पूरा करने के लिए डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।

यह अच्छी बात है कि रियायती अप्रत्यक्ष कर ढांचे को नई जीएसटी व्यवस्था के तहत जारी रखा गया है, जिसमें स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग में निवेश करने की अनुमति है।

ड्यूटी डिफरेंशियल स्कीम के तहत शामिल किए जाने के लिए सीपीई गुड्स की व्यापक सूची

कस्टमर प्रीमाइज इक्विपमेंट (सीपीई) उत्पादों की सूची को अपडेट करने और व्यापक बनाने की जरूरत है ताकि इसका लाभ सभी हितधारकों को मिले। नेटवर्किंग स्विच, वायर्ड और वायरलेस एक्सेस प्वाइंट, यूएसबी एडेप्टर और वायरलेस एक्सेस कंट्रोलर्स जैसे उत्पादों को उत्पाद शुल्क रियायत योजना, या अप्रैल 2017 के बाद 12% जीएसटी की प्रिफेरेंशियल रेट वाली सूची में शामिल किया जाना चाहिए।

केंद्रीय और राज्य अप्रत्यक्ष कर के दायरे वाले आईटी प्रोडक्ट्स को एक किया जाए

केंद्र और राज्य अप्रत्यक्ष कर के दायरे वाले आईटी प्रोडक्ट सूची को एक करने की जरूरत है ताकि उद्योग के खिलाड़ी अपने आईटी गुड्स पर लाभ का सही दावा कर सकें जिस पर उनका हक है  और अनावश्यक मुकदमेबाजी से बच सकें। केन्द्र सरकार द्वारा जारी की गई एक विस्तृत सूची को राज्य सरकार संदर्भ गाइड के तौर पर अपने मौजूदा वैट कानूनों के तहत आईटी गुड्स की सूची में शामिल करे।

इस संबंध में यह भी आवश्यक होगा कि राज्य सरकारों को निर्देश जारी कर ये सुनिश्चित करने के लिए कहा जाए कि मेरिट रेट कैटेगरी के तहत ‘आईटी गुड्स यूनिफॉर्म लिस्ट’ को बरकरार रखा जाए।

आईसीटी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कन्वर्जेंस सेलकी स्थापना

इंडस्ट्री के रिप्रजेंटेशन के 30 दिनों के भीतर नए आईटी प्रोडक्ट को वर्गीकृत करने के लिए एक ‘कन्वर्जेंस सेल’ की जरूरत है। इससे देरी, भ्रम की स्थिति के साथ ही वर्गीकरण मुद्दों से उत्पन्न होने वाले कर संबंधी मुकदमों को कम करने में मदद मिलेगी।

श्री कुनकोलियंकर ने कहा इंडस्ट्री को कारोबार सुगमता के लिए मुख्य नीतिगत उपायों के जरिये मैन्युपैक्चरिंग, स्टैंडर्ड्स और अनुपालन जैसे कि सीआरओ, आयातनिर्यात प्रक्रिया, कौशल विकास समेत सभी क्षेत्रों से संबंधित मुद्दों को संबोधित करने के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है

 सिफारिशों का सार प्रस्तुत करते हुए श्री अनवर शिरपुरवाला, कार्यकारी निदेशक, एमएआईटी ने कहा, “कुल प्रोडक्शन लागत कम कर ऐसे इकोसिस्टम बनाने की जरूरत है जिससे कि स्थानीय आईटी मैन्युफैक्चरर्स वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें। आईटी मैन्युफैक्चरर्स की मौजूदा क्षमताओं का प्रतिकूल कर नीतियों और खराब इकोसिस्टम के कारण अब तक पूरा दोहन नहीं हुआ है।, ”

श्री शिरपुरवाला ने ज़ोर देते हुए कहा, “फिलहाल, कई विनियामकीय और परिचालन संबंधित मुद्दें आईटी हार्डवेयर इंडस्ट्री के लिए चुनौती बने हुए हैं। अलग-अलग सरकारी मशीनरी और अधिकार क्षेत्र में वर्गीकृत आईटी प्रोडक्ट्स को कन्वर्जेंस सेल के जरिये एक ही सूची में शामिल किया जा सकता है। अगर सरकार मेक इन इंडियाजैसे अभियानों के लिए गंभीर है तो इन परिचालन संबंधित मुद्दों को जल्दी से हल किया जाना चाहिए। “

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